शनिवार, 15 मार्च 2014

जनता साबधान् सत्ताविकेन्द्रीकरण परमाणु बम्ब से भी घातक.


आज देश के कई बड़े लोग हैं जो चाहते हैं के सत्ताविकेन्द्रीकरण करण हो, परंतु जब हम उन लोगों के बारे मे जानेंगे तो पता चलता है सत्ताविकेन्द्रीकरण  इनकी सोची साँझी राजनीति नीति है.

सबसे पहले हम जानते है की यह है क्या: किसी एक पार्टी दुआरा दूसरी पार्टी को सपोर्ट  करना सत्ताविकेन्द्रीकरण  नही है.परंतु किसी पार्टी को सशर्त समर्थन देना और अपनी सकती दूसरी पार्टी के समांतर रखना या दूसरी पार्टी के समांतर सत्ता चलाना सत्ताविकेन्द्रीकरण .होता है
इस्पस्ट है सत्ता मे सहयोग करना सत्ताविकेन्द्रीकरण नही होता है 
वंही केजरीवाल का विकेन्द्रीकरण तो और भी विस्तृत है उनका कहना है की हर गाव और गाली के हर वियाक्ति के पास सत्ता चाल्लाने की तगत हो, अरे भाई सभी के राज करने से अराजकता नही फैलेगी  वास्तव मे ऐसा संभव नही है एह सिर्फ अराजकता फैलाने का एक मध्यम है और एही केजरिबाल का मकसद है.

सत्ताविकेन्द्रीकरण  का समर्थन करने बाले लोग,

1- अमीर ख़ान: यह सत्ताविकेन्द्रीकरण  की बात करता है जिस पर उसके ही सगे भाई ने भेद भाव करने के कई बार आरोप लगाये है अपने घर मे सारी सकती अपने हाथ मे रखते है और  देश को हजारों  जगह देना चाहता है.

2-शारुख ख़ान: जो पहले ही कह चुका है की वो देश मे पूर्ण सुरकसित नही है इतना
 ही नही पाकिस्तान ने भारत से सुरक्षा देने को कहा है और तो और पाकिस्तान ने उसे पाकिस्तान मे रहने की दावत की है इतना ही नही शारुख भी कह चुका है की अगर मोदी प्रधानमंत्री बना तो वो देश छोड़ देगा.

3- प्रसान्त भूसन:  जो कहता है की कासमीर से सेना हटा लेना चाहिये  यानि की देश का गद्दार.

4- केजरिबाल: जो भारत के सम्भिधान का अपमान करता है एक अराजक पुरुष|

5- आप पार्टी: जादातर देश विरोधी ताकड़ों के पैसे पर खड़ी हैं इसकी साइट पर कश्मीर को पाकिस्तान का भाग बताया गया है इसके जादातर नेता अलगाव वादी है केजरी की तो पूरी मानसिक्त माओवादी

6-नितीश कुमार:  जो चीन से मिला हुआ है और उसके ही साथी स्वराज दुआरा 25 लाख लेकर मोदी को रोकने का आरोप लगा चुका है,

7-थर्ड फ्रंट: जिसमे जादातर बाम दल है जो देश विरोधी सकतिओं का समर्थन करती है

8- कश्मीरी नेता: जो जादातर अलगावबाडी हैं.

9-मुल्ला मुलायम: जो चीन पर तो बोलता है परन्तु पाकिस्तान पर कभी नही बोलता है,

सत्ताविकेन्द्रीकरण सत्ताविकेन्द्रीकरण के नुकसान

उच्च स्तर पर:

1- अगर कोई कठोर देश हित का निर्णय लिया जायेगा तो देश विरोधी शक्तियाँ उस निर्णय पर रोक लगाने काम करती हैं.

2- अगर किसी पार्टी को ऐसा लगे की फला कानून से उसकी पार्टी को नुकसान होगा तो वो उस कानून को पास नही होने देगा भले ही एह कानून देश हिट मे हो.

3- पार्टियाँ अपने निजी फायदे के लिए देश हिट को ताक पर रख देती है .

4-जब सत्ता अलग अलग पार्तिओं को होती है तो वो अपने निजी स्वार्थ के कारण टूट जाती है और सरकार गिर जाती है.और चुनाव का अतिरिक्त बार सहें करना पड़े हैं.
5- अगर कोई अच्छा काम होता है तो उसका श्रेय सभी लेने की कोशिस करते है इसमे कोई बुराई नही है परंतु जब कोई गलत काम होता है तो हर कोई अपनी जिम्मेदारी से हटता है और आरोप दूसरे पर मड़ता है ऐसे मे जनता कॅनफ्यूज़ हो जाती है की कौन सही है और कौन गलत है जो आरोपी होता है वो सॉफ बच जाता है हर आदमी अपनी जिम्मेदारी से भाग कर अपने को पाक और सॉफ  कर लेता है जब अभी के हाल के 10 सालों मे सत्ता के दो केन्द्र थे तब देश की हालत क्या हो गई है यह सभी जानते है अब सोच सकते हैं की जब हर हाट मे सत्ता होगी तब क्या होगा . इसी सत्ता वीकेन्डरी करण के कारण केजरी की खुद की पार्टी 2 महीने मे ही अपने पतन की राह पर है 
निचले स्तर पर

1- अगर किसी गाव मे  प्रधान बना  वो 5 सालों मे ही अपने को तागत  वर बना लेगा और बहू बलि बन जायेगा.

2- उच्च सत्ता के काम मे हस्त छेप करने लगेगा लोग अपनी निजी तागत बदायेँगे जिसका लाभ वो अपने निजी कामों मे लगाएंगे  जबकि सत्ता का सीधा सा मतलव समाज सेवा है.

3-कुछ बहू बलि अपनी तागत से स्तानीय ज़मीन पर हमेसा राज करना चाहेंगे .

4- एक मैदान पर दो प्रतिदूंधी होने पर टकराव की स्थिति पैदा हो जाते है अब अगर एक ही गाव मे ऐसे 10-20 बहू बलि हो गये तो लडकर मरने लगेंगे.

5- अगर हर  गाव मे कोई ना कोई सत्ता की चाह रखने बाले होते है पर वो बहू वाली होंगे तो मामला घातक होगा चारों तरफ अराजकता फेल जायेगी.

और केजरिबाल इसी प्रकार की अराजकता फैलाना चाहता है जिससे देश विरोधी तागतों का काम आसान हो जाये. और देश के टुकड़े हो जाये इसी लिए उसे  ( C .I. A) का एजेंट कहा जाता है

इसलिए युवाओ सावधान देश को सत्ता विकेन्द्रीकरण की नही केन्द्रीकरण और ससक्त नेत्रत्व की ज़रूरत है .

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें