शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2014

अंतरिक सामाजिक & आर्थिक समस्या निवारण गुरु |

अंतरिक सामाजिक & आर्थिक समस्या निवारण गुरु। 

मोदी जी हम चाहते हैं की हमारा देश सिर्फ बिकसित ना हो पूर्ण रूप से विकसित हों इसका मतलब है की हमारा देश आर्थिक रूप से तो विकसित तो हो ही सामाजिक रूप से भी विकसित हो इसका मतलव है की हमारे देश का इंसान  सबसे जादा खुश हो, 

इसके लिए देश मे सामाजिक एकता & समानता बनी रहे  उसके लिए भी समांतर रूप से योजना होनी चाहिए जैसे की पूर्व काल मे राजा लोगों के  पास एक धर्म गुरु होता था उसी प्रकार से सरकार का मार्ग दर्शन हेतु एक "गुरु" नमक संस्था हो जिसका एक ही उद्देश्य होना चाहिए,  अंतरिक सामाजिक & आर्थिक समस्या निवारण गुरु, इसके दो भाग होने चाहिए 

1- सामाजिक गुरु 2-आर्थिक गुरु

1-सामाजिक गुरु मे निम्न लोग होने चाहिए

दलित चिंतक
सामान्य चिंतक
मैरिड महिला चिंत्क
अनमैरिड महिला चिंत्क
युवा समस्या चिंतक
स्टूडेंट समस्या चिंतक
समाज सुधारक
साइंटिस्ट
धर्मगुरु
 इसके अतिरक्त दो अस्थाई  पड  जिनका सम्बंध सीधे समस्या से हो 
इन सब का काम होना चाहिए हर रोज किसी ना किसी समस्या पर चर्चा करना चाहिए और उसके निवारण का तरीका तलासना उस समस्या से सम्बंधित जो भी निष्कर्ष निकले उसकी रिपोर्ट पर दैनिक या मासिक रूप से अपने सरकार को भेजे .

आ-हर दिन समस्याओं पर चर्चा करें और सामंजस्य निकालें 
ब-ओन लाइन समस्या सुनने और उस पर सीधे जनता के साथ चर्चा करके समाधन करने के आधुनिक साधन और तरीके होने चाहिए 
स- अगर कोई समस्या ज़ादा जटिल हो तो उसके समाधान हेतु 72 घंटो के अंदर बंहा पहुच कर समाधान करना चाहिए
द-इसके ऑनलाइन सदस्या बना कर जनता का ज़मीनी स्तर पर लेने चाहिए.


2-अर्थ गुरु: इसके अंदर निम्न सदस्य होने चाहिए
आधुनिक बैज्ञानिक
किशान
बिज़्नेस मन
यूबा बेरोजगार
महिला चिंतक 
दो आर्थिक बिशेसगया 
दो अन्य अस्थाई पड जो बर्तमान समस्य पर विचार रखने बाले हों.

नोट : यह संस्था पूर्ण रूप से स्वतंत्र हो और इसका अधयक्ष  प्रधान मंत्री हो और उपाध्यक्ष  इन्ही मे से एक हो 

इसका काम जनता और सरकार को सिर्फ सलाह देने का काम प्रमुख होना चाहिए इसके मधायम् से जनता की समस्याओं से जादा से जादा ज़मीनी स्तर पर जुड़ना होना चाहिए 

बुधवार, 26 फ़रवरी 2014

जवाब दो मोदी माफ़ी क्यू मांगे ?

आज के दिन देखते हैं कि पूरा मीडिया , पत्रकार , कांग्रेस , और मुस्लिम एक ही बात पर टिके हैं कि मोदी माफ़ी मांगें अगर गलती नहीं हुई है तब भी नैतिकता के आधार पर मोदी को माफ़ी मांगनी चाहिए कोई मुझे बतायेगा कि मोदी माफ़ी क्यू मांगे जब मोदी ने गलती नहीं कि है तब माफ़ी मांगने का कोई औचित्य नहीं है यह सारा सर न इंसाफी है एक अच्छे भले इंसान पर दवाव क्यू डाला जा रहा है
कुछ लोग कह रहे है कि सन १९८४ के सिख दंगों के लिए कांग्रेस माफ़ी मांग चुकी है

१- कांग्रेश के कुछ नेताओं ने माफ़ी मांगी जो जायज़ है किओंकी १९८४ के दंगों में कांग्रेशी इन्वॉल्व थे इसबात का सबूत यह है खुद राहुल जी इस बात को मान चुके हैं राजीव जी ने भी कहा था जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है साफ़ है सिख दंगे कांग्रेस ने ही करबाय थे जब वो इस दंगो के लिए जिम्मेदार थे तो माफ़ी मांग कर कोई उपकार या अहसान नहीं कर दिया जनता पर ।
२- अब अगर नैतिकता कि बात करें तो राहुल जी इस समय बागडोर सम्भाले हुए है क्या उन्होंने माफ़ी मांगी है अगर उनोहने नहीं मांगी है तो यह नैतिकता सिर्फ मोदी के लिए क्यू है मेरे भाई।
३-मोदी जी किसी भी प्रकार से इस दंगो में शामिल नहीं थे तो फिर उनेह माफ़ी क्यू मांगनी चाहिए यह सारा सर गलत बात है मीडिया को इस सिलसिले को ख़तम करना चाहिए
४-अगर नैतिकता कि बात करते है तो समाज चिंतक और मुस्लिम और मीडिया मुझे जबाब दे हज़ारों सालों तक सवर्ण सम्माज ने दलित पर अत्याचारो कि हद क्र दी  तो क्या सवर्ण समाज ने दलितों से नैतिकता के आधार पर माफ़ी मांगी है
५-सैकड़ों सालों तक मुसलमानो ने हिंदुओं और सिखों का  खून बहाया उन पर जुल्म किए क्या उसके लिए मुसलमानो ने माफ़ी मांगी है फिर मोदी माफ़ी क्यू मांगे ।
६-जो जुल्म अंग्रेजों ने भारतियों पर किय क्या इसके लिए इंग्लैण्ड ने माफ़ी मांगी है तो मोदी माफ़ी क्यू मांगे ।
७- गांधी जी ने भगत सिंह को आतंकी कहा उसके लिए क्या गांधी जी माफ़ी मांगी अगर नहीं तो मोदी माफ़ी क्यू मांगे

---आर्यन्स विरोधी 

मंगलवार, 25 फ़रवरी 2014

निज़ी छेत्रों में आरक्छण दलित हित के खिलाफ,कारण आंबेडकर वाद पर कर्ण का सिद्धांत हावी । 

कुछ दलित नेता कई सालों से दलितों के लिए निजी संस्थानो में आरक्छण कि मांग कर रहे है हो सकता है उनेह कुछ फायदा दीखता हो परन्तु जंहा तक मेरा सबाल है मुझे तो इसमें सिर्फ दलितों का नुक्सान ही दिख रहा है  इसके निम्न कारन  हैं

१- निजी छेत्रो में जातिवाद न के बरावर है कुछ एक लोग ही है जो आज इस गन्दी बात को महत्व देते है जादातर लोग जातिवाद को महत्व नहीं देते हैं
२-निजी छेत्रों में नौकरियां जाति प्रमाण पत्रो के आधार पर नहीं मिलती है योग्यता के आधार पर मिलती हैं
३-सब जानते है दलित समाज ८५ % और सवर्ण समाज सिर्फ १५ % ही है परन्तु निजी छेत्रों में बहुत अधिक संख्या दलित समाज कि होती है जो अपनी योगयता के बल पर चयनित होती है उनके साथ पक्चपात नहीं होता है बांह सिर्फ कम कि बात होती है
४- आज भी अधिकतर  ९० % दलित लोग  कर्ण के सिद्धांत पर अपनी जात को छिपा कर काम करते हैं या कह सकते है अपने को सवर्ण में आत्म सात करके काम करते है कुछ भी सही पर लोगों को रोजगार तो मिलता है
५-अगर निजी छेत्रों में आरक्छण लागू होगा तो नौकरियां योग्यता कि जगह जाति प्रमाण पत्रों को देख कर मिलने लगेंगी जिससे व्यापारी का तो नुक्सान होगा ही साथ में दलितों का भी बहुत बड़ा नुक्सान होगा किओंकी कोई भी आरक्छन ५० % से अधिक नहीं हो सकता है जबकि उनकी संख्या ८५ % से भी जादा है अगर हम ५० % भी आरक्छन देंगे तब भी ३५ % दलित लोग नौकरी पाने से बंचित हो जायेंगे उनकी जगह सवर्ण आ जायेंगे सीधे २ ३५ % नौकरिओं का नुक्सान।
६- आज अगर कोई दलित दयनीय अवस्था में है और उसके पास कोई फर्म  है अगर बांह पर सवर्णो का बोल बाला हो तब वो दलित कर्ण के नियम पर अपने को सवर्ण बता कर काम प् सकता है और अपनी  सुधार सकता है परन्तु जब आरक्छण लागू हो जायेगा तब तो वो चाह कर भी रोजगार नहीं प् पायेगा अगर उस कंपनी का आरक्छण कोटा भरा हो

निष्कर्ष : हम सीधे २ कह सकते हैं कि निजी छेत्रों में आरक्छण दलितों के हित में नहीं इतना ही नहीं यह जातिवाद को वढ़ावा भी देगा जिससे अराजकता भी फ़ैल सकती है
मायावती दलित प्रेमी नहीं दौलत प्रेमी है 

अभी कुछ दिन पहले बहन मायावती जी ने एक बक्तव्य दिया कि मैं श्री मोदी जी को प्रधान मंत्री नहीं बनने दूँगी इसका कारन था कि मोदी जी उनेह दलित विरोधी लगते हैं अरे भाई जब मोदी जी खुद दलित पिछड़े हुए  वर्ग से हैं तो वो उसी समाज का बुरा कैसे कर सकते है मैं यह नहीं कहता कि आप दलित समाज कि शुभ चिंतक नहीं हो शायद हो परन्तु सिर्फ अपने आप को दलितों का ठेकेदार मानकर और दूसरों को विरोधी मानकर सिर्फ बात करने से काम नहीं चलेगा ज़रुरत हो उनके विकास के लिए ठोस कदम उठाने का परन्तु आपने तो दलितो को सिर्फ अपना बोट बैंक ही बनाया है उनके उद्धार के लिए कुछ भी नहीं किया है आज आपके राज्य में जंहा पर आप ४ बार मुख्य मंत्री बन चुकी हो उसमे दलितो कि स्थिति अन्य राज्यों से दयनीय है  आज दलित जाग चूका है अब वो आपका सिर्फ वोट बैंक नहीं रह सकता है आप हमेशा जो कांग्रेस के गीत गाती रहती हो वो कितना गलत है आपने कभी जातिवाद , छुआछूत और भेदभाव को मिटाने के लिए कड़ा कानून बनाने के लिए कभी कोशिश  नहीं की । 
१- आरक्छण तो बाबा साहव देश आज़ाद होने से पहले ही दिल गए थे इसमें आपने कोई नया नहीं किया है बल्कि दलितो के हक़ को छीन कर मुस्लिमो को दिलाने कि हर कोशिस करती रहती हो । 
२ आपको दलितों से नहीं दौलत से अधिक प्यार है इसी लिए लोग आपको दलित कि वेटी कि जगह दौलत कि वेटी  कहने लगें है । 
३-आप बेस कीमती मूर्तियां बनवाती हो , मुस्लिमों को सोने के मुकुट पहनाती हो, खुद नोटों के हार पहनती हो परन्तु दलितो के लिए ऐसी कोई व्य्वस्था नहीं करती जिससे उनेह कोई रोजगार मिले या उने न्याय पाने में आसानी हो  अगर आपने कोई फर्म  बनबाई होती जिसमे दलितों कि अधिकता होती नहीं बनबाई इतना ही नहीं आपने कोई मीडिया चैनल तक नहीं बनबाया जिसमे दलितों पर होने बाले अत्याचारो को दिखाया जाता। 
४- आपने तो और दलितो पर अत्याचारों के खिलाफ कानून हरिजन एक्ट को कमज़ोर ही कर दिया 
५-आपने भेद भाव रोकने और उसे मिटाने कि कोई योजना नहीं बनाई सिर्फ बाबा साहव का नाम लेकर अपना वोट बैंक वनाती रही जिसका इतना परिणाम है कि जिस राज में आप सबसे ताकतवर मुख्य मंत्री के रूप में सरकार में थी तव एक टिकैत जैसा आम आदमी आपको जाती सूचक शव्दों से अपमानित करता है और बाबा साहव के बनाय कानून का सहारा लेकर उसको गिरफ्तार करने में आपके पूरे प्रशासन के हाथ पैर फूल गए थे तो आप अंदाजा लगा सकती हो कि आम दलित पर कितने अत्याचार होते होंगे और कितना भेद भाव होता होगा परन्तु आपने उसे मिटाने के लिए कोई कई योजना नहीं बनाई  फिर दलितो को प्रेम और सम्मान कैसे मिल सकता है 

बहन  जी  दलित युवाओं को आरक्छन कि नहीं सम्मान और प्रेम कि ज़रुरत है युवा  अपने दम पर जगह बनाते है अगर उनका हक़ नहीं मिलेगा तो उसे लड़कर हाशिल किया जा सकता है परन्तु समानता ,प्रेम और सम्मान लड़ कर प्राप्त नहीं किय जा सकते है उसके लिए योजनाये और जगीरती होना परम आवश्यक है 

आज समाज में  जो भेद  ख़तम हुआ है उसके दो कारन है १-शिक्षा २-हिन्दू धर्म के कथा बाचकों का सत्संग में भेद भाव के खिलाफ प्रवचन देना भले ही वो लोग व्य्क्तिगत रूप से गलत हो पर उन्होंने समाज को सुधारने में अहम् काम किया है परन्तु आपने तो कुछ भी नहीं किया है 
अब भी समय है कुछ नियम और योजनाएं दलित उद्धार हेतु बनाएं। 



महिलाओं के बदलने पर ही बदल सकता है समाज!


पुरसों के बदलने से क्या होगा? जब महिलायें ही ना बदलें!
आज नारी सुरकछा की बातें हो रही है उसी को ध्यान मे रखकर मेरा एह लेख है पाठकों से अनुरोध है की फ्री समय जब भी उनके पास हो तो निम्न लिंको को ज़रूर पड़ें फिर विचार करें की देश मे परिवर्तन कैसे होगा ?
Some Links For Thinks1 , 2 , 3 , 4 , 5 , 6 , 7 , 8 , 9 , 10 , 11 , 12 , 13 , 14
आज में अन्य अपराधों की बात नही करूंगा सिर्फ बलात्कार की बात करता हू
आ) जो लोग मासूम और नादान बच्चिओं का बलात्कार करते है उनमे जादातर उनके नज़दीके लोग ही पाये जाते है पर वो ऐसा क्यू करते हैं कभी उकी मानसिकता का पारिकछन किया जाता है और उनकी मानसिकता ऐसी क्यू होती है दूसरी बात उनकी है जो ब्रद्ध महिलाओं का बलात्कार करते हैं उनकी मानसिकता कैसी होती है
इन दोनो प्रकार के लोग सेक्स से बंचित और निराश हो सकते हैं इनकी सेक्स की इच्छा ही इनकी बीमारी बनजाती है परंतु समाज और परिबारों मे सेक्स के बारे मे खुल कर बात ना हो पाने के कारण उनकी मानसिकता बड जाती है ना तो उनका कोई इलाज़ होता है ना ही कोई समाधान जिसके कारण वो और भी ज़ादा बिचिप्त हो जाते है और अपराध करते है यह याद रखने बाली बात है सेक्स की भूँख इंसान को हैवान बना देती है इसलिए परिवार और सरकार की ज़िम्मेदारी वन्ती ही की वो ऐसे नियम बनाएं की लोग सेक्स से बंचित ना रह पायें .
ब) अब हम उन बलात्कार के बारे मे बात करते हैं जो  जादातर जबान लड़किओं खास कर समझदारों के साथ होते हैं
इन बलात्कारों मे दो परकार के बलात्कार होते हैं
आ) गैंग रेप , ब )- सिंगल रेप
गैंग रेप
गैंग रेप करने बाले 3 तरह के हो सकते हैं
1: वो लोग जो रेप के माध्यम से पैसा कामना चाहते है और और वीडिया बना कर बेच देते हैं यह लोग बहुत ही जादा खतरनाक होते हैं जो किसी भी प्रकार से लड़किओं को फसा सकते हैं या जावरजस्ती करसकते हैं
2: कुछ आवारा लडको के गुरुप जो रात विरात विना रोक टोक के इधर उधर घूमते रहते हैं जो बिना बजह अपनी सेक्स की भूँख को मिटाने हेतु किसी को भी अपना सिकार बना लेते हैं वास्तव मे इनमे कोई ना कोई बहुत जादा पैसे बाला होता है या फिर किसी ना किसी नेता से तालुक रखता है जिसे किसी बात का ड़र नही होता है
3-तीसरे प्रकार के रेप वो लड़के करते हैं जो किसी लड़की से अपमानित हुए होते है और बदला लेने के साथ 2 उसे हद से भी जादा तकलीफ देना चाहते है इसमे जादातर वो ही लड़किया शिकार होती हैं जिन्होने कभी किसी ना किसी का जाने अनजाने अपमान किया हो,इस प्रकार के लड़के वीडिओ फिल्म भी  बना  सकते हैं
2- सिंगल रेप
1: सिंगल रेप भी किसी ना किसी दुस्मनी के करण ही होते है यह रेप जादातर धोखे से होते है और किसी ना किसी जान पहचान के वियाक्ति दुआरा ही होते हैं इन रेपों को अंजाम देने के लिए ,नशा, लालच,एकांत,सेक्स उत्तेजक दवा का सहारा लिया जाता है इस प्रकार के रेप किसी ना किसी अपमान या खुन्नस मे किए जाते है चाहे करने बाला कोई भी हो
2: कभी कभी लड़कियां भी खुन्नस मे या फिर बदले की भावना से अपने सहमति से सेक्स को रेप का नाम दे देती हैं
उपाय
गैंग रेप मे नम्बर 1 बाले रेप रोकना कानून और सरकार के हाथ मे हैं कानून सख्त,जाच तीव्र,और न्याय शीघ्र प्राप्त हो तो इस प्रकार के अपराध करने बालों पर रोक लगाई जा सकती है
गैंग रेप मे नम्बर 2 बाले रेप रोकना समाज के हाथ मे जादा है ,परिवार चाहे अमीर हो या गरीव उनेह अपने बच्चों को नैतिक सिकचा की जानकारी देने मे कंजूसी नही करनी चाहिए और साथ मे सेक्स सिकचा की जानकारी उसके नुकसान से अबगत करना चाहिए हर संस्था मे नैतिक सिकचा और सेक्स अपराद की जानकारी देना अनिवार्य करना चाहिए और इसकी सुरुआत औरतों को अपने 2 घरों से करनी होगी ?
इसके बाद के जितने भी रेप हैं जिनमे औरत की असहमती और घ्रणा या अपमान मुख्य कारण होते है उसके लिए औरतों को अपनी पूरी सोच बदलनी होगी और एक क्रांति कारी सोच बननानी होगी
1- यह तो कभी संभव नही है की कोई लड़का किसी लड़की को चाहे और वो उससे अपने दिल की बात ना कहे चाहे कुछ भी हो जाये वो कहेगा ज़रूर चाहे कितने भी कड़े कानून क्यू ना हों किओंकी स्त्री-पुरुष का आकर्षण बहुत ही जटिल होता है उस पर रोक लगाना असंभव के समान है अगर कोई लड़की किसी से प्रेम नही करती है और वो लड़का उसे किसी तरह से बार 2 कहता है तो उसका अपमान करने से बचें और कोई ऐसा रास्ता निकालें की वो आपसे नफरत या खुन्नस ना रखे बल्कि आपके प्रति दया रखे ,उसे ऐसे समझाया जाये की उसे उसके प्रेम से नफरत नही है परंतु वो उसके प्रेम को स्वीकार करने मे पूर्णता असमर्थ और मजबूर है और वो उसके प्रेम नही उसकी दया की पात्र है ऐसा करने पर लड़के का अपमान भी नही होगा और लड़के को कोई खुन्नस भी नही होगी, और उसकी सहानभूत����� ही मिलेगी परंतु उससे सतर्क फिर भी रहना चाहिए और उसे ऐसा भी नही लगना चाहिए की आप उससे दूरी रखना चाहती हैं
2- कुछ जगह क्या जादातर जगह पर बेवफाई भी अपराध का करण वन्ती है जैसे अश्लील वीडिओ क्लिपिंग,बलात्कार,चेहरे पर तेजाव डालना,
में तो बस इतना ही कहना चाहता हून की अगर कोई लड़की समाज से डरती है या समाज को जादा महेत्व देती है प्रेम की तुलना मे, तो प्रेम ही ना करे तभी अच्छा है और अगर किसी से प्रेम करें तो उसे हर हाल मे निभायें अगर वो ऐसा नही करती है तो परिणाम बुरा भी हो सकता है फिर उसका सामना करने को हर प्रकार से तयार रहना चाहिए
3-अहसान वास प्रेम :- एक बात और आती है की कुछ लड़कियां लडको से अपने बहुत सारे काम करवाती हैं उनके करीव भी रहती है कभी तो हद हो जाती है जब वो सिर्फ अपने काम को करवाने मात्र को लड़के को झूंठे प्रेम का दिलासा या भरोषा भी देती है परंतु जब उनका काम निकल जाता है तो वो उन लड़कों से दूर होने लगती हैं जब वो लड़का उससे कुछ बात करता है तो लड़की कहती है की ऐहसान के बदले मे मुझसे प्रेम चाहते हो जो उचित नही है इतना कहते ही अपनी सारी गलतिओं को लड़कों के उपर डाल देती है और लड़का निरुत्तर होकर या तो नफरत मे उसका नुकसान करता है या हीनता मे अपना नुकसान करता है और लड़की एक शव्द कह कर आज़ादी से रहती है
अहसान के बदले प्रेम को चाहना गलत है परंतु उससे भी जादा गलत वो होता है जो किसी को झूंठे प्रेम का दिलासा दे कर अपना मन चाहा काम करवाना इसलिए दोनो ही बातें गलत है अगर एक सही हो तो दूसरी अपने आप सही हो जाती है ,इसलिए लड़की को कभी भी किसी की भाबना से खेल कर अपना काम नही निकल वाना चाहिए अगर कोई काम करबाना होता है तो उसे सिर्फ मदत के तौर पर करवाना चाहिए और अपने बीच किसी भी प्रकार के भ्रम को दूर करना चाहिए
एक बात और वताना चाहता हूँ की एक औरत ,पुरुष से सब कुछ पाने की आसा रख सकती है और रखती भी है परंतु एक पुरुष एक औरत से सिर्फ एक ही चीज प्रेम पाने की आसा रखता है और जब औरत लाख कसमें खकर और वादे करने के बाद उसी प्रेम को देने से मुकर जाये तो आप अंदाज़ा लगा सकते है की उसकी हालत क्या हो सकती है और वो किस हद तक क्या कर सकता है कोई नही जान सकता है
इसलिए इस मामले मे लड़किओं को ईमान दार होना ही पड़ेगा अन्यथा गलत परिणामों को कोई नही रोक सकेगा
4- आज की नारी जो बदलाव चाहती है वो बतायें की समाज का निर्माण तो परिवार से होता है और परी बार को औरत का रण छेत्र माना जाता है जंहा पर हर औरत अपना वर्चस्व कायम करना चाहती है और दूसरी औरत को अपना परम् शत्रु मानती है उसे हर प्रकार से नीचा दिखाने के लिए हर प्रकार का षड्यंत्र पूरे जीवन भर चालू रहता है हर रिश्ते को अपने दुसमन के रूप मे ही रखती है ,देवर-भावी,सास-बहू,ननद-भावी,देवरानी-जिठानी ऐसे रिश्ते जिनमे शायद ही कभी वन्ती हो , इतना ही नही औरत के प्रति हर अपराध मे औरत का ही हाथ होता है कन्या भूर्ण हत्या मे औरतों का हाथ जादा होता है
औरत को एह जानना होगा की उसका दुसमन पुरुष से जादा  औरत ही होती है आज औरत को दोहरी लड़ाई लड़नी होगी ,पुरुष की सोच के साथ 2 अपनी सोच भी बदलनी होगी हर औरत को अपनी सखी ,बहेन, और मा या वेटी मानना ही पड़ेगा तभी बदलाव संभव है
5- आज जो महिलायें कहती हैं की हमें दया नही सम्मान की ज़रूरत है पर सम्मान और प्रेम का गहरा रिश्ता होता है
औरतों के बारे मे एक बड़ी कड़वी कहावत है की जादातर पुरुष औरत को अपने ******** समझते हैं पर जो लोग औरत को अपने सर का ताज समझते है औरतें उनेह क्या समझती हैं यह भी एक कड़वी सच्चाई है जिसके बारे मे हम किसी और ब्लॉग मे लिखेंगे
परंतु इतना ज़रूर कहते हैं औरत के इस दोहरे नज़रिए के करण ही अधिकतर लड़के फ्रॉड या गलत रास्ते पर चलने को मजबूर होते हैं अगर औरत सम्मान और प्रेम चाहती है तो उनेह भी अपनी सोच बदलनी होगी हर स्तर पर तभी बदलाव संभव है वर्ना आज औरत पर भरोषा करने बालों की सांख्या कम होती ही जा रही है अगर कोई किसी औरत का भला करना भी चाहे वो भी खुले आम तो लोग कहते है की एक औरत के लिए (कुछ समय पहले हमारे एक जागरूक नेता के मुख से भी इस प्रकार का शव्द निकल गया था जो की एक सच्चाई है )
इस सोच को अगर बदलना है तो औरत को समाज मे विचारो मे परिवर्तन हेतु क्रांति करनी होगी
अन्य उपाय
1- सबसे पहले तो जातीबाद और धर्मबाद पर पूर्ण रोक लगाना ज़रूरी है सरकारी और गैर सरकारी हर विभाग मे इन जातीबादी और मज हवी शव्दों के प्रयोग पर प्रतिबंध होना चाहिए ,
2- सेक्स स्वंत्रता होनी अनिवार्य है
3- कन्या भूर्ण हत्या का कानून बहुत ही सख्त होना चाहिए
4-महिलाओं को अपना नज़रिया बदलना होगा और हर घर से शुरूआत करनी होगी इसके लिए मीडिया का भरपूर प्रयोग करना चाहिए


5-नारी संरकछन कानूनो का गलत इस्तमाल पर रोक का प्रवधान होना चाहिए
हिंदुस्तानियो ” गर्व से कहो हम हिज़ड़े हैं “
आज भारत के हालत इतने ज़ादा खराब हैं की जीना तो दूर की बात है एक 2 दिन काटना मुस्किल है

पाक की नापाक हरकत, चमेल सिंह के अंग निकाले

अब ऐसा लगता है जल्दी से उपर बाला उठा ले कम से कम इस शर्मिंदगी से तो बच जायेंगे अब तो अपने हिन्दुस्तानी होने पर शर्म आती है आज सेक़ुलर सरकार ने और हिन्दू समाज ने ऐसी हालत पैदा कर दी है की आदमी कुछ नही कर सकता है सिवाय मरने के ! ” रोना चाहो तो घर बाले रोने नही देते
जीना चाहो तो समाज बाले जीने नही देते
दर्द अगर बाँटना चाहो तो मनुवादी साथ नही देते
मर रहे है हमारे बच्चे भूँखे-प्यासे से तडप 2 कर मांगते है
जीने भर को रोटी और पानी ,वो भी नही देते
दुसमन देश ने देश को बेहाल कर दिया हम
हमला करना चाहें तो हमला हमे करने नही देते
घर मे घुसकर आतंकी हमारी आबरू लूटते हैं अगर
कोई प्रतिरोध मे हत्यार उठाले तो सेक़ुलर उसे हिन्दू आतंकी का दाग लगा कर जीने नही देते
हिन्दुत्व की बुराई पर लिखो तो छूट है पर अपने भटके हुए कुछ मुस्लिम भाईयों को समझाने हेतु
सकारात्मक भी लिखो तो मीडिया बाले उसे सम्प्रदायिक का नाम दे कर छपने नही देते
सरकार कहती है की जीना होगा पर जीने के लिए जो
सम्मान और काम की ज़रूरत है वो कभी नही देते
हाल बहुत बुरा है भाइओ सोचो अगर खुदकुशी करने की तो यह
वेरह्म कानून बाले,गैर कानूनी कह कर खुदकुशी भी करने नही देते
गर सोचो की अपने इतने नीच दुसमन(पाक) से
बात ही ना की जाये तो यह चुप भी रहने नही देते
इस देश की महिलाओं का तो हाल ही मत पूछो समाज उन्हे
जैसे-तैसे जिंदगी तो देता है पर उन्हे जीने नही देते “
800 सालों की ग़ुलामी मे भी इतनी विवसता नही थी शायद जितनी आज है भारतीए नेताओं और समाज की मर्दानगी सिर्फ औरतों और दलितों पर ज़ुल्म ढाने के लिए हैं दुसमन से टक्कर लेने के लिए सब हिज़ड़े ही क्यू है
आज भारत माता से सिर्फ इतना पूछना चाहता हूँ की इस धरती पर आजकल सिर्फ हिज़ड़े ही क्यू पैदा हो रहे हैं कोई मर्द क्यू पैदा नही होता है
और कुछ नही कहना है!

फतवे वाले कठमुल्लों को फांसी कब?


आज कल फतवों की बड़ी धूम मची है आखिर यह फ़तवा होता क्या है आज कल कुछ मुस्लिम कठमुल्ले इसे एक सलाह के तौर पर बता रहे है और कहते हैं की इसमे मानने और ना मानने पर कोई ज़ोर नही है इनकी किताबों मे चाहे जो लिखा हो पर इसकी ज़मीनी हक़ीक़त बहुत ही भयानक होती है और इसे अमानवीए फतवा आतंकबाद कह सकते हैं और यह तालिबानी ज़िहादी आतंकबाद से हज़ारों गुना घातक और कुरुप है ज़िहादी आतंक से इंसान एक बार ही मरता है पर इस फ़तवा आतंक से इंसान की सोच,विकास,आज़ादी,आत्मा हमेसा मारते रहते हैं और इनके फतवे ऐसी 2 चीजों पर लगते हैं की पूछो ही मत पागल को भी इन पर शरम आ जायेगी  लिंक पड़ें
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जो लोग कहते है की फ़तवा एक “सलाह” है वो ज़रा भारतीए नीति शास्त्र पर गौर करें
1- सलाह क्या है ? सलाह एक उक्ति है किसी समस्या को हल करने की
2-सलाह उचित समय और ज़रूरत पड़ने पर ही देना उचित होती है
3-कौटिल्या चड़क्या ने कहा है की अनुचित समय पर और बिना ज़रूरत के या बिना मांगे सलाह देने बाला महा मूर्ख होता है उसकी जग हसाई होती है और जिसे वो सलाह देता है उसकी नज़र मे उसका महेत्व कम हो जाता है
पर क्या फतवो का इनसे कुछ भी समवंध हैं
लड़किओं पर अनाप समाप फतवे लगाय जाते है और उनेह ना मानाने पर उनके साथ बलात्कार करने की धमकी देते है अभी हाल की कश्मीर की घटना इस बात का सबूत है
सिर्फ चन्द बड़े शहरों के अमीरों को छोड़ कर फतवे बड़े से बड़े अमीर की हालत खराब कर देते हैं  में खुद इस बात का गबाह हूँ जैसा की सब जानते हैं की में जादातर  अपने साथ हुई या अपने सामने हुई घटना को ही उधारण के रूप मे देता हूँ
सच्ची कहानी अभी 2 साल पहले मेरे ही गाव की
पता :लड़के का नाम- शहनबाज़ मलिक, वालीद-मो-ज़ुम्मा ,ज़िला -बरेली (ऊ.प)
अपराध : इसका अपराध सिर्फ इतना था की इसने अपने ही गाव के मुस्लिमों से एह कहना शुरू कर दिया की इस्लाम मे पिता की ज़यदात मे लड़की का “=” बराबर का हक है पता नही उसने कौन सी क़ुरान पड लि थी वो चुप ही नही बैठ रहा था मेरे गाव का वो मेरा 4वें नम्वर का परम मित्र है सो उसे हमने भी चुप रहने को कहा , पर वो माना नही और हैदराबाद से किसी क़ुरान को ले आया और सबको  बताने लगा ,अरे मिया एह बात बरेली के आला हज़रत तक पहुंच गई और फ़तवा ज़ारी हो गया बरेलवी के पास से ,जिसे मस्ज़िद मे पड कर सुनाया गया और फिर उस लड़के की जिंदगी दोज़ख से वद्तर कर दी गई
सभी मुसलमानो ने उससे बोलना छोड़ दिया, कहने लगे की वो तो सुन्नी से बहाबी हो गया है ,हर दुकान दार ने सामान देना बंद कर दिया ,उसके खेतों मे काम करना भी बंद कर दिया ,उसके सारे दोस्तों ने भी बोलना खतम कर दिया हन भई लोगो जो दोस्ती का रिसता कभी किसी भी  दीवार से नही टूटा है वो इस फतवे से खतम हो जाता है,उसकी तय हुई शादी भी टूट गई,मस्ज़िद मे जाना हराम हो गया,जिस रास्ते से वो गुज़ारता था लोग अपने घरों मे घुस जाते थे ,उसके खुद के बाप ने भी बोलना बंद कर दिया और घर छोड़ कर अपने रिस्तेदारों मे ���ले गये,उसक������� धान कूटना,गेहूँ पीसना सबकुछ  बंद कर दिया ,मुसलमानो ने  दुकानो से सामान देना भी बंद कर दिया  हाँ भाई लोगे ने अपना वियापार खतम किया पर  बोले नह��� ,उसके बाप को चड़ा कर उसकी संपत्ती को रिस्तेदारों ने अपने नाम करबाने का पूर्ण प्लान बना लिया
अपने घर से संपन्न 200 बीघा ज़मीन का मालिक, दिमाग से मजबूत 20 साल का लड़का इतना मजबूर हो गया की मुझे 3 घंटे उसके साथ हर रोज़ बैठना पड़ता था और उसे समझना  पड़ता था, मैने उसे बहुत  समझाया की  टू  परेशान मत हो , अगर मुस्लिम  नही बोलते हैं तो हिन्दू हैं ही बोलने के लिए, काम हिन्दू करेंगे,सामान हिन्दुओं की दुकान से ले लो,और रही बात ज़मीन की तो वो तुम अदालत से लड कर ले ही लोगे पर अगर लड़ना ही चाहते ही तो आगे बड जाओ  और अगर ऐसा नही कर सकते हो तो बापस चले जाओ और जैसा वी करते है बैसा ही करो.
हर तरह से संपन्न और जागृत लड़का इतना मजबूर हो गया की की 2 महा के अंदर ही उसे माफी माँगनी पड़ी ,तो फिर लड़किओं की क्या विसात है जो लड सकें एह कोई पुरानी बात नही है मात्र 2 साल पुरानी मेरे गाव की की हकीकत है जिस किसी को विस्वास ना हो वो मुझ से मिलकर मेरे गाव मे जा  सकता है वो आज भी मेरा अच्छा दोस्त है में उसका नंबर भी दे सकता हूँ पर एह उचित नही होगा .
अब बताओ किस मूह से एह कठमुल्ले कहते हैं की फ़तवा एक सलाह है
वास्तव मे फ़तवा कोई सलाह फलाह नही है बल्कि एह अमानवीए आतंकबाद है जिसमे सारे कठमुल्ले हैवनियत का गुंडा और नंगा नाच करते है
हमारे देश मे एह फतवे बाले लादेन के भी बाप है और घातक आतंकी हैं खांप बाले भी इनके ही भाई हैं जब तक फतवे (फरमान) बाले गुंडे हैं तब तक महिलायें सुरकच्छित कैसे हो सकती है
में इतना कह सकता हूँ हर इंसान की तागत उसकी महिला मित्र (पत्नी) और परिबार होता है पर जब एही साथ ना हों तो इंसान कुछ भी कर पाये सही से , शायद मुमकिन नही ,उसके साथ भी ऐसा ही हुआ , हमारे घर के नज़दीक मे एक सभ्य मुस्लिम परिबार है वो लोग रात मे छुप कर उससे बात कर लिया करते थे तो उन पर भी फतवे की पूर्ण तयारी हो गई इस लिए उन्होने भी बोलना बंद कर दिया
नोट : कोई भी पाठक फतवे के समर्थन मे एह ना कहे की एह सलाह है अगर वो एह कहता है तो वो मेरे मेल(aryance.virodhi@rediffmail.com) पर संपर्क करे और मेरे गाव आकर उस लड़के से खुद ही मिल सकता है हमारे गाव का बच्चा2 भी इस बात   को  बता देगा
उपाय
एक बड़ा ही सीधा और सरल उपाय है पर उसे करने को कठोर इच्छा शक्ति की ज़रूरत है
1-अब से 30 साल पहले तक जितने भी फतवा देने बाले जिंदा हैं सबको ढूंड कर पकड कर फांसी दे दी जाये और उनकी सम्पती ज़ॅप्ट करके एक महिला सुरकछा दल बनाया जाये
इस दल के 3 भाग हों,
1-स्वतंत्र मीडिया चैनल,जो महिलाओं को जागरूक करने का काम करें
2-सामाजिक इस्टर पर ज़मीनी आन्दोलन संचालित इकाई
3-सैनिक दल जो पुर भारत मे फ़तवा और फरमान लगाने बालों की तालास करके पकड कर लाये और उनेह फांसी लग्बाने की कड़ी करबाहि करे, और जो कहते है की फ़तवा सलाह है उनेह घसीट 2 मारा जाना चाहिए ऐसी सलाह वो भी पाखण्डिओब की देश को नही चाहिए .