मायावती दलित प्रेमी नहीं दौलत प्रेमी है
१- आरक्छण तो बाबा साहव देश आज़ाद होने से पहले ही दिल गए थे इसमें आपने कोई नया नहीं किया है बल्कि दलितो के हक़ को छीन कर मुस्लिमो को दिलाने कि हर कोशिस करती रहती हो ।
२ आपको दलितों से नहीं दौलत से अधिक प्यार है इसी लिए लोग आपको दलित कि वेटी कि जगह दौलत कि वेटी कहने लगें है ।
३-आप बेस कीमती मूर्तियां बनवाती हो , मुस्लिमों को सोने के मुकुट पहनाती हो, खुद नोटों के हार पहनती हो परन्तु दलितो के लिए ऐसी कोई व्य्वस्था नहीं करती जिससे उनेह कोई रोजगार मिले या उने न्याय पाने में आसानी हो अगर आपने कोई फर्म बनबाई होती जिसमे दलितों कि अधिकता होती नहीं बनबाई इतना ही नहीं आपने कोई मीडिया चैनल तक नहीं बनबाया जिसमे दलितों पर होने बाले अत्याचारो को दिखाया जाता।
४- आपने तो और दलितो पर अत्याचारों के खिलाफ कानून हरिजन एक्ट को कमज़ोर ही कर दिया
५-आपने भेद भाव रोकने और उसे मिटाने कि कोई योजना नहीं बनाई सिर्फ बाबा साहव का नाम लेकर अपना वोट बैंक वनाती रही जिसका इतना परिणाम है कि जिस राज में आप सबसे ताकतवर मुख्य मंत्री के रूप में सरकार में थी तव एक टिकैत जैसा आम आदमी आपको जाती सूचक शव्दों से अपमानित करता है और बाबा साहव के बनाय कानून का सहारा लेकर उसको गिरफ्तार करने में आपके पूरे प्रशासन के हाथ पैर फूल गए थे तो आप अंदाजा लगा सकती हो कि आम दलित पर कितने अत्याचार होते होंगे और कितना भेद भाव होता होगा परन्तु आपने उसे मिटाने के लिए कोई कई योजना नहीं बनाई फिर दलितो को प्रेम और सम्मान कैसे मिल सकता है
बहन जी दलित युवाओं को आरक्छन कि नहीं सम्मान और प्रेम कि ज़रुरत है युवा अपने दम पर जगह बनाते है अगर उनका हक़ नहीं मिलेगा तो उसे लड़कर हाशिल किया जा सकता है परन्तु समानता ,प्रेम और सम्मान लड़ कर प्राप्त नहीं किय जा सकते है उसके लिए योजनाये और जगीरती होना परम आवश्यक है
आज समाज में जो भेद ख़तम हुआ है उसके दो कारन है १-शिक्षा २-हिन्दू धर्म के कथा बाचकों का सत्संग में भेद भाव के खिलाफ प्रवचन देना भले ही वो लोग व्य्क्तिगत रूप से गलत हो पर उन्होंने समाज को सुधारने में अहम् काम किया है परन्तु आपने तो कुछ भी नहीं किया है
अब भी समय है कुछ नियम और योजनाएं दलित उद्धार हेतु बनाएं।
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