मुस्लिमों को आरक्षण देना दलितों का हक छीनने के बराबर है
देश आज़ाद होने से पहले ही आरक्षण पास हो चुका था इस आधार पर तो पाकिस्तान मे भी दलित हिन्दुओं को अरकछन होना चाहिए परंतु वँहा की सरकार तो हिन्दुओं के पटन पर लगी हुई है.
कांग्रेश ने हर छेत्र मे जातिवाद को बडवा दिया है और पक्कचपात् की राजनेति की है.
हर छेत्र मे दलितों के हक को मुस्लिमों को दे दिया जाता है अगर देश का बिभाजन धरम के आधार पर नही होता तो हम मुस्लिमो के अरकछन का . ज़रूर करते परंतु अब तो किसी भी आधार पर उनके लिए अरकछन ज़ायज़ नही बंटा है जब तक वो हिन्दू ना हों
अगर दो भाई है और दोनो को बांट कर अलग हिस्सा दे दिया जाये उसके बाद अगर एक भाई काहे की में तो जो बचा हुआ है उसमे से भी आधा या हिस्सा लूँगा तो किसी आधार पर उसका हिस्सा नही वनता है आरक्षण सिर्फ दलित हिन्दुओं के लिए है तो फिर उनके हक पर मुस्लिमो क्या अधिकार वनता है रही बात गाँधी की उन्होने मुस्लिमो से कहा था की मुस्लिम भारत मे रह सकते है तो सॉफ सी बात है की एह पूरा देश सिर्फ गाँधी जी का ही नही था उनके इस करण का ज़रज़स्त विरोध हुआ था येन्हा तक उनकी जान तक चली गई |
आज मुस्लिमों को आरक्षणदेना दलितों का हक छीनने के बराबर है
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें