हिन्दुजन एवं सभी रास्ट्रभक्त जातिवाद छोड़ें , जातिवाद घोर अंधविस्वास एवं रास्ट्र पतन का मुख्य कारण ।
मुख्य बिषय : जातिवाद पर पूर्ण रूप से कानूनी
रोक हेतु |
1-हिन्दू धर्म क सभी
प्रमाणिक ग्रंथो जैसे वेद, गीता, महाभारत, रामायण, में जातिवाद नही है
और वर्णवाद मे मुख्या कर्मो को बंटा गया है. इतना ही नही चारों वर्ण हर आदमी के
अंदर होते हैं और हर इंसान कोशिस करके इन चारों उपलावदियों को प्राप्त कर सकता है
.
2-जिस प्रकार वैदिक
संस्क्रति मे आयु,जीवन, को 4 भागों में बंटा है उसी प्रकार काम को चार वर्णो मे विभाजित काइया गया है इंसान
को बांटने का तो प्रश्न ही नही उठता है.
3- इसके अलावा पुराण, स्मिरतियाँ ऐसी
कितावें हैं जिनमे बहुत अधिक विरोधाभाष है जिसके करण इनेह पूर्ण
प्रमाणिक नही माना गया है. इसलिए इन किताबों को किसी भी कार्य मे आधार नही माना जा
सकता है.
4-हिन्दू धर्म की कोई
भी प्रमाणिक पुस्तक इस बात की पुष्टि नही करती है की जातिवाद कोई धार्मिक या
जन्मजात वियवस्था है.
5-कुछ विरोधा भाषी
अप्रमाणिक ग्रंथों से ऐसा ज़रूर प्रतीत होता. है की कुछ राजनीतिक लोगों ने इन
ग्रंथों की मूल आत्मा के साथ सेयासात और आर्थिक फायदे के लिए मनमानी छेड़ छाड किया
गया है और देश का संबिधान इस वियवस्था को स्वीकार करने को बाध्य नही हो सकता है.
6- जब जातिवाद का कोई
बैज्ञानिक आधार नही है इंसान को बांटने का, इतना ही नही धार्मिक आधार भी नही है सिर्फ अस्पष्ट
आधार पर कैसे कैसे नियम बन सकता है.
7- किसी समाज विशेस की
सेयासात के तहत समाज मे फैलाई गई इस अस्पष्ट जातिवाद को देश का कानून क्यू बनाया
गया है.वजाय इसमे सुधार करके खतम करने के एक समाज विशेस के कहने मात्र से और तथा
कथित जातिओं के आधार पर प्रमाण पत्र बना देना देश के कानून के लिए शोभा नही देता
है..
8-सरकार को क्या हक
है उसी समाज के आधार पर जन्मजात जातिओं मे बांटने का. और समाज को बांट
कर जातीय टकराव, भेद भाव पैदा करने का.
9- प्राचीन काल मे तो
लोग अपने वर्ण और तथ कथित जातिओं को स्वेचा से से बदल सकते थे परंतु बर्तमान कानून
के तहत कोई जाती नही बदलसकता है कानून ने तो जातिवाद को जन्मजात
बना दिया है.
10- आज अगर कोई अपने को
उच या दूसरे को निम्न समझ कर किसी का अपमान करता है भेद भाव करता है उसके लिए
सरकार जिम्मेदार है.
11-अगर सरकार कहती है
की उससमय के कार्य आधारित तत्कालीन समाज के आधार पर बनाई गई है परंतु
जनमजात ही क्यू? ऐसे तो फिर आज के
समय मे एक डाक्टर, इंजी. मॅनेजर जातियाँ ही हुई तो फिर सरकार इनके वेटों को घोषित क्यू नही करती
है आज किसी गाव या शह्र मे एक ही प्रकार के कार्य करने बालो को अलग 2 प्रकार के
जाति प्रमाण पत्र देना भी गलत है
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