जातिवाद रहते, आर्थिक आरक्षण दलितों पर अन्याय! -3
अब हम अपने निस्कर्ष पर बात करते है हमारे कहने का तात्पर्य एह नही है की हम आर्थिक आरक्षण का विरोध कर रहे हैं हमारे कहने का मतलव एह है की सबसे पहले जातिवाद पर पूर्ण रोक लगे उसके बाद आर्थिक आरक्षण हो
संबिधान मे जातिवाद पर रोक हेतु कठोर और दंडात्मक कानून बने
1- सरकारी या गैर सरकारी किसी भी प्रकार के कर्मचारी के नेम प्लेट पर या कंही भी कोई जाती सूचक शव्द ना हो |
2-नश्ल भेदी टिप्पणी करने बालों पर, जातिगत भेदभाव और छुआछूत करने बालों के लिए उतना ही कड़ा कानून हो जितना कड़ा कानून, बलात्कार करने बाले के लिए है
3-किसी भी ऐसे संस्थान, सभा और कम्पनी इतियादि को मान्यता ना दें जिसमे किसी भी प्रकार का कोई जाती सूचक़ शब्द या कार्य हो |
4-जिन धार्मिक संस्थानो या स्थलों मे भेद भाव जैसी चीज पाई जाये तो उसे गैर कानूनी घोषित कर उस पर पूर्ण बैन लगाया जाये|
5- सरकार और साधु संतों को मिलकर इस भेद भाव को खतम करने हेतु उचित प्लान बना कर काम किया जाये|
6-इंटेरटेनमेंट जगत और मीडिया को भी समाज को जागरूक करने हेतु खुल कर काम करना चाहिए
जब संबिधान मे यह कानून बन जाये तव आर्थिक आरक्षण
और देश मे लोगों की सहायता के लिए काम करने हेतु
1-सबसे पहले देश भर मे निस्पक्छ पारदर्शी आर्थिक व्यापक सर्वे किया जाय जिसके तहत आने बाले परिणामो के आधार पर विकास के 3 स्तर बनाये जायें जिनेह कोड के रूप मे . जाये
कोड "आ" : इसके अंतर्गत 7000/माह कमाने बाले परिवार और भूमि हीन परिवार रखे जायें
कोड "ब: : इसके अंतर्गत 7000/माह से 35000/माह कमाने बालों को रखा जाये भले ही वियव्साय कुछ भी हो |
कोड "स" : इसके अंतर्गत 35000/ माह से ----अनन्त तक कमाने बाले को रखा जाये
इसी आधार पर आय प्रमाण पत्र बने ,ध्यान रहे इस आय प्रमाण पत्र पर सिर्फ कोड बर्ड हो और हर परिबार को इसी कोड वर्ड का एक उनिक नंबर दिया जाये जिसे सिस्टम मे डाल कर देखने पर उस वियाक्ति की वास्तविक आय का पता चले|
हम नही कहते की एह विचार पर्याप्त है इस तरह के और भी विचार हो सकते है पर उन पर चर्चा तो हीनि चाहिए
हर 5 साल पर इस सर्वे को इसी प्रकार से रीचेक करने का प्राव धान बनाया जाये
इतना ही नही हर रजय सरकार को एक लक्ष्य दिया जाये की वो हर 5 साल मे बताये की उसके राज्य मे कितने प्रतिशत लोग कोड आ से ब और ब से स मे गये है जो राज्य सबसे अच्छा प्रदर्शन करे उसे इनाम देने का भी प्राबधान् हो और जो राज्य सबसे कम तरक्की दिखाय उसे चेतावनी भी देनी चाहिए परन्तु द्यान रहे एह सारी प्रकिया केन्द्र सरकार अपने इस्टर पर करे वर्ना राज्य अपने फायदे के लिए झूठे आंकड़े भी दिखा सकती है इतना ही नही केन्द्र सरकार को हर सरकार को एक निस्चित लकच्च्य देना चाहिए जिसे पूरा करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी हो इतना ही नही केन्द्र सरकार को अपने पास भी कोई एक लकच्य रखना चाहिए जिस पर ध्यान रखते हुए हर राज्य को जिम्मेदारी देनी चाहिए
नोट : अब राज्य सरकारें या केन्द्र सरकार जनता को आय के आधार पर सहायता कर सकती हैं
जैसे
कोड आ के लिए :
1- भोजन,पानी, विजली के दाम करे और जो लोग असाह्य या भूमि हीन हो उनके लिए पूर्ण मुफ्त करे|
2- इनके बच्चों की सिकचा या उच्च सिकचा के लिए टिउसन फीस माफ होनी चाहिए , आने जाने के लिए किराया और नौकरी के लिए फॉर्म फ्री होने चाहिए
3-आर्थिक विकास हेतु और अधिक सहायता जो भी उचित हो देनी चाहिए
4- इस वर्ग मे आने बाली लड़किओं के लिए हर प्रकार की छूट की सुबिधा होनी चाहिए 5- किशान जो भी आयें उनकी फ़सलों पर होने बाले खर्च का पूर्ण भुगतान सरकार करे
6- इस वर्ग के बच्चों के स्थाई रोजगार बीमा की किस्त सरकार को भरनी चाहिए
कोड ब मे आने बालों को कोड स मे ले जाने हेतु हर प्रकार का उचित कार्य करना चाहिए कोड स को जाड़ा से जादा प्रोत्साहन करना चाहिए ताकि वो देश की तरक्की मे अपना पूरा सहयोग कर सकें |
आर्थिक आरक्षण
अब जितना भी आरक्षण देना हो तो सिर्फ कोड आ बालों को ही देना चाहिए उसकी प्रक्रिया निम्न होनी चाहिए
1- सबसे पहले कोड आ के कोड नंबर से पता लगाया जाये की उसकी वास्तविक आय कितनी है
2-योगता के आधार पर एक लिस्ट बनानी चाहिए
3- अब पूर्ण पारदर्शिता के आधार पर देखना चाहिए की सबसे योग्य कौन है और अगर वास्तव मे उसकी वास्तविक आय कम हो तो उसे आरक्षण देना चाहिए परन्तु ध्यान रहे इस क्रिया मे योगता को ही महेत्व देना चाहिए इसके पीछे मेरा तर्क यह है
अगर हम आर्थिक स्थिति को महेत्व दे कर सिर्फ उन लोगों को आरक्षण देंगे जिनि आय सबसे निम्न है तो हो सकता है जो लोग बच जायेंगे वो अपनी तरफ से योग्य बनने की जगह अपनी आय को कम करने की कोशिस करने लगेंगे इसलिए दूर दर्शिता को देखते हुए योग्यता मुख्य और आय गौण होनी चाहिए
अपने सभी पाठक गनो से नम्र निवेदन है की निस्पक्छ रूप से अपने अपने विचार रखने की किरपा करें
हम तो सिर्फ इतना मानते हैं की किसी भी आदमी और औरत के जन्म जात जाती और धर्म सुनिस्चित करना कानून या सरकार का काम नही होना चाहिए, सरकार किसी की जाती क्यू निर्धारित करती है जबकि एह ना तो धार्मिक रूप से प्रमाणित हैं ना ही मानवता के हिसाव से :
सरकार का काम होना चाहिए विकास,न्याय हर इंसान को रोटी और रोजगार देना| जाति निर्धारित करना सरकारी अपराध है हम इस इंसान को बांटने बाले सरकारी कानून का खण्डन करते हैं जिसके कारण लोगों को जिंदगी भर अपमानित होना पड़ता है
अगर सरकार कहती है की हमने आधुनिक कार्य के आधार पर जातियाँ बनाई हैं तो भी गलत है एक ही गाव मे एक ही तरह् के विय्व्साय करने बालों की जातियाँ भी अलग 2 क्यू होती है ? सॉफ है की सरकार सिर्फ तथा कथित जातिओं को ही महेत्व देती है जिनका कोई ठोस धार्मिक तथ्य नही है और सरकार का एह कानून धर्म के जातीय अंधविस्वास को महेत्व ही नही देता बल्कि बडवा भी दे रहा है
सरकार का काम होना चाहिए विकास,न्याय हर इंसान को रोटी और रोजगार देना| जाति निर्धारित करना सरकारी अपराध है हम इस इंसान को बांटने बाले सरकारी कानून का खण्डन करते हैं जिसके कारण लोगों को जिंदगी भर अपमानित होना पड़ता है
अगर सरकार कहती है की हमने आधुनिक कार्य के आधार पर जातियाँ बनाई हैं तो भी गलत है एक ही गाव मे एक ही तरह् के विय्व्साय करने बालों की जातियाँ भी अलग 2 क्यू होती है ? सॉफ है की सरकार सिर्फ तथा कथित जातिओं को ही महेत्व देती है जिनका कोई ठोस धार्मिक तथ्य नही है और सरकार का एह कानून धर्म के जातीय अंधविस्वास को महेत्व ही नही देता बल्कि बडवा भी दे रहा है
धन्यबाद
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