राहुल करें तो लीला, जयललिता करें तो कैरेक्टर ढीला!
अभी कुछ दिन पहले जब राहुल के ग़ुलाम (शिन्दे) ने एक राजनीतिक चाल खेली की देश के सभी मुख्य मंत्रिओं को एक पत्र लिख कर आदेश दिया की देश मे कंही भी मुस्लिम आतंकिओं को परेशान ना किया जाय और उनेह छोड़ दिया जाय तब पूरी कांग्रेश शिन्दे का समर्थन कर रही थी जबकि एह देश को खंडित करने बाला कदम था पर जब अभी कुछ दिन पहले जय ललिता जी ने राजीव गाँधी जी के हत्यारों को रिहा करने का आदेश दिया किओंकी वो अपनी सज़ा का ज़ादातर भुगतान कर चुके हैं तो राहुल जी चीख रहे हैं और कह रहे हैं की इस देश मे जब प्रधान मंत्री को इंसाफ नही मिल सकता है तो गारीओं को इंसाफ कैसे मिल सकता है और कांग्रेश इसका जबाब श्री मोदी जी मांग रही है वैसे राहुल जी आप सही कह रहे हैं जब पी एम को इंसाफ नही मिलता तो आम आदमी को इंसाफ कैसे मिल सकता है आज आपको इस बात को अंदाज़ा तो लग ही गया होगा की जब किसी की इंसाफ नही मिल पाता है तो उसे कितना दरद होता है ज़रा सोचिय की जब आप जैसे का दर्द का यह हाल है तो उन गरीबों का क्या हाल होता होगा जिनके पास रखने को घर नही , सोने को बिस्तर नही, खाने को राशन नही ,न्याय पाने को पैसे नही उनकी इकलौती आस (बेटा,बाप,भाई) आतंकिओं के हमले बे मौत मारे जाते है और उनेह न्याय नही मिलता है और एकाध को मिलता है तो आपके ग़ुलाम मंत्री वोटों की खातिर रिहा करबाने के लिय अनप सनाप पत्र लिखते है और छुड़वा देते है में तो सिर्फ इतना समझता हूँ आपके कुकर्मो का रि-एक्सन है जो समय ने ललिता के मध्यम से दिया है अभी भी समय है देश को बाँटना और वोट बैंक की राजनीति करना छोड़ दो
आज जो सबाल आप ललिता या मोदी जी से कर रहे हो वो अपने ही मंत्री शिन्दे से करो जबाब आपको मिल जायेगा बाकी आप बहुत समझदार हैं
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