शुक्रवार, 4 अप्रैल 2014

पाकिस्तान के पंच प्यारे देश के लिए सबसे बड़ा खतरा!

पाकिस्तान के पंच प्यारे देश के लिए सबसे बड़ा खतरा
1-मुल्ला मुलायम
करण : 1- मुल्लापूजन के लिए  किशानो और दलितों के विकास खतम किया
               2-चीन पर बोलता है परंतु पाकिस्तान पर नही बोलता है
2-मिँया केजरी दलाल
करण : 1-देश मे अराजकता फैलाने के लिए सत्ता विकेन्द्रीकरण  करना चाहता है
              2-किसी भी सम्म्वैधानिक संस्था पर भरोसा नही करता है
              3-हिंसक आन्दोलन और झूंट बोलना इसका मुख्य काम
            4- फिर से ज़मीदारी प्रथा चालू करके दलितों का शोषण करना चाहता है
               5- काश्मीर को पाकिस्तान को दे चक्का है औपचारिक घोषणा बाकी है
3-नितीश हाज़ी
   करण : 1- मोदी को रोकने के लिए चीन से आर्थिक सहायता लेता है इसके ही साथी इस पर आरोप लगाते हैं
                2- नक्सलीओं से मिला हुआ है
                3- विहार को आतंकिओं की राजधानी बनाने की योजना है
4-बेगम सोनिया
   करण  : 1- आरोपी इमाम से मिलकर मुसलमानो के वोटो को कांग्रेश को दिलबाने की अपील करना
                  2-हिन्दुओं को जातिवाद (अलग अलग जातिओं मे रख कर लड़बाना ) मे बांट कर राज करना
                   3-सेक़ुलरता के नाम पे बहुसंखयकों का हद से जादा शोषण करना
                   4- देश को हर प्रकार से लूटना और वारवाद करना
5-मुल्लापूजक सेक़ुलर ज़मात
 इनके कुकर्मो का बखान करना असंभव है इनका बस चले तो आज ही देश पाकिस्तान को दें दें.

आज इस देश को खतरा ना तो चीन से है , ना पाकिस्तान से है , ना मुसलमान से है ना हिन्दुत्व से है इस देश को खतरा इन पाकिस्तानी पॅंच प्यारों से है जो देश को खंडित करवाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं 

बुधवार, 2 अप्रैल 2014

अम्बेडकर 'दलितों-स्वर्णों' को एक करना चाहते थे

मित्रो, विगत वर्षो से हम
देखते आ रहे हैँ कि कुछ लोग
डा॰अम्बेडकर का नाम लेकर
और उनकी कुछ टिप्पणियोँ का
सहारा लेकर हिन्दू धर्म
की मान्यताओँ पर चोट करने
का प्रयास कर रहे हैँ। लेकिन
इसी के साथ डा॰साहब की
600 पेज की महान पुस्तक
"थाट्स आन पाकिस्तान" को
योजनाबद्ध ढंग से दबा दिया
गया। इस पुस्तक को दबाने
का मूल कारण ही यही था कि
डा॰अम्बेडकर के सही विचार
सामने आ गये तो दलितोँ को
राष्ट्र-विरोधी राजनीति मेँ
शामिल करने की कोशिशेँ सदा
के लिए असम्भव हो जायेगीँ।
कमाल की बात तो ये है कि
डा॰अम्बेडकर ने अपनी इस
किताब को "साम्प्रदायिक
राजतीनि का ज्ञान-कोष"
कहा है। पुस्तक की भूमिका मेँ
लिखा है कि इसे लिखने मेँ
मेरी सारी रचानात्मक ऊर्जा
समाप्त हो गयी है। बावजूद
इसके बाबासाहब के नाम
पर राजनीजि और समाज-
सुधार का ढोँग करने वालो
ने इस पुस्तक को दबाये
रखना ही मुनासिब समझा।
मैँ सभी जिज्ञासुओँ से कहूँगा
कि आप डा॰अम्बेडकर की
उक्त पुस्तक अवश्य पढ़े। अब
मैँ आप लोगो के सामने कुछ
तथ्य रखना चाहूँगा, जिनकी
जानकारी शायद आपको नहीँ
होगी-

1- डा॰अम्बेडकर का
जातिनाम-'अम्बेडकर', असल
मेँ ब्राह्मणोँ का जाति-नाम है।
और डा॰साहब ने यह नाम
हाईस्कूल के अपने एक ब्राह्मण
शिक्षक से लिया था, जिनका वे
बहुत आदर करते थे।

2- डा॰ अम्बेडकर की पत्नी
सारस्वत ब्राह्मण थी।

3- डा॰ अम्बेडकर ने अपना
स्थायी आवास "राजगृह"
बम्बई के एक ब्राह्मण बहुल
मोहल्ले मेँ बनाया था।

4- सन् 1937 के चुनाव मेँ
डा॰अम्बेडकर ने भोपतकर
और केलकर जैसे चितपावन
ब्राह्मणोँ के साथ गठबंधन
किया था।

5- डा॰अम्बेडकर मानते थे कि
आर्य किसी जाति का नाम नहीँ
है और आर्य भारतीय थे।

6- डा॰अम्बेडकर ने यह बात
सिद्ध करने के लिए पूरी पुस्तक ही लिखी है कि शूद्र
दरअसल क्षत्रिय थे और अछूत
समाज के लोग भी आर्यो के
समाज के ही अंग थे। पुस्तक
का नाम है "शूद्र कौन थे"

7- डा॰ अम्बेडकर ने हिन्दू
धर्म छोड़ने के बाद जब किसी
अन्य पंथ मेँ जाने की बात
सोची थी, तो उन्होनेँ इस्लाम
को इसलिए अस्वीकार किया
था, क्योँकि उनके अनुसार
इस्लाम एक 'विदेशी पंथ' है
और इस प्रकार मुस्लिम होने
का अर्थ 'धर्म का परिवर्तन ही
नहीँ' बल्कि देश का परिवर्तन
भी है। डा॰साहब ने यह बात
कई बार सार्वजनिक रूप से
कही है।

8- डा॰ अम्बेडकर दालितोद्धार
के कारण आर्य समाज का
बहुत सम्मान करते थे और
स्वामी श्रद्धानंद के प्रति उनके
मन काफी श्रद्धा थी।

9- डा॰ अम्बेडकर ने शुरू मेँ
ही समझ लिया था कि
पाकिस्तान मेँ दलितो पर
मुस्लिम अत्याचार करेगेँ।
उन्होनेँ सन् 1942 मेँ लिखा
था-पाकिस्तान मेँ गैर-मुस्लिमोँ
की वही हालत होगी जो
हिटलर के राज मेँ यहूदियोँ
की है। आज देखिए उनकी
बात अक्षरसः सत्य सिद्ध हुई।

10- डा॰अम्बेडकर मुस्लिम
लीग को ही नहीँ कांग्रेस के
मुस्लिम नेताओँ को भी
साम्प्रदायिक मानते थे। उन्होनेँ
काफी ब्यौरे से लिखा है कि
मौलाना आजाद, डा॰अन्सारी,
डा॰किचलू जैसे तथाकथित
राष्ट्रवादी मुस्लिम नेता
राजनीति मेँ मुस्लिम लीग के
ही अनुयायी थे।

11- डा॰अम्बेडकर की
प्रमाणिक जीवनी के लेखक
धनंजय कीर ने अपनी पूरी
पुस्तक मेँ डा॰अम्बेडकर की
तुलना सावरकर से ही की है।

12- 1948 मेँ बंटवारे के
बाद डा॰साहब ने सार्वजनिक
वक्तव्य देकर पाकिस्तान के
दलितो से से कहा था कि वे
धर्म-परिवर्तन न करेँ और
भारत आ जाएं। और यदि
दलित भाइयोँ को वहाँ जबरन
मुस्लिम बनाया गया होगा
तो वे उन लोगो का शुद्धिकरण
करायेगेँ।

13- डा॰अम्बेडकर ने
हैदराबाद के दलितो से कहा
था कि वे भारत राष्ट्र के
विरूद्ध निजाम या मुस्लिमोँ
का साथ न देँ।

नोट- उत्तर प्रदेश सरकार
द्वारा अनुवादित डा॰अम्बेडकर
की तीन पुस्तकोँ के अनुवाद
करने वाले 'आशुतोष मिश्र'
जी की पुस्तक "डा॰ अम्बेडकर
और मुस्लिम साम्प्रादायिकता"
से साभार।

प्रस्तुति- आशीष प्रताप सिँह


"जबतक जातिवाद रहेगा हिन्दुस्ता बर्वाद रहेगा |
जब जातीबाद मिटेगा तभी देश आगे बड़ेगा|
जातिवाद मिटाना है हिन्दुस्तान बचाना है |
जातिवाद मिटाना है मानवता को बचाना है |  "

सारी कायनात लगी है एक शख्स(मोदी) को झुकाने में!

China मोदी के खिलाफ !
America
मोदी के खिलाफ !
CIA
मोदी के खिलाफ !
CBI
मोदी के खिलाफ !
IB
मोदी के खिलाफ !
ISI
मोदी के खिलाफ !
PAK
मोदी के खिलाफ !
Congress
मोदी के खिलाफ!
JDU
मोदी के खिलाफ !
BSP
मोदी के खिलाफ !
SP
मोदी के खिलाफ !
CPI
मोदी के खिलाफ !
CPIM
मोदी के खिलाफ !
AAP
मोदी के खिलाफ !
लालू, मालू, भालू, कालू, राहु, कजरी, मोदी के खिलाफ !
सारे गद्दार मोदी के खिलाफ !
सारे देश द्रोही मोदी के खिलाफ!
सिर्फ देशभक्त ही मोदी के साथ!
हम और तुम भी मोदी के साथ!
और मोदी जी देश के साथ |
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"सारी कायनात लगी है एक शख्स को झुकाने में...
खुदा भी सोचता होगा,
जाने किस मिटटी का इस्तेमाल किया मैंने "मोदी" को बनाने में."


"हर हर मोदी" गलत तो "ब्राहम्ण देवता" सही कैसे ?

आज पूरा मीडिया हर हर मोदी के नारे पर चीख रहा है इतना ही नही कुछ धर्म गुरु भी आपत्ती कर रहे हैं हमे आप से कोई ऐत राज नही है परन्तु आप के दोहरे नज़रिये से ज़रूर  आपत्ती है आप हर हर मोदी को तो गलत कहते हो परंतु "ब्राह्मण् देवता" वाक्य पर कभी आपत्ती नही की है आज मीडिया को एक मोदी को हर हर कहने पर आपत्ती है परंतु पूरी जाती के हर बच्चे को जन्म से ही देवता कहने बाले इस वाक्य पर कोई आपत्ति नही है किओंकी एह वाक्य मनुवादी मीडिया( मीडिया मे काविज़ ब्राह्मणो) को भगबान वनाता है इसलिये एह किओन विरोध करेंगे , मोदी का विरोध होगा किओंकी वो ब्राह्मण नही है और इनका मानना है की देवता स्वरूप और कोई हो ही नही सकता है चाहे वो कितना श्रेस्ट काम करे  जब की हमारा सनातन धरम नर से नारायण की बकालत करता है , इंसान अपने श्रेस्त कर्मो से देवता तुल्य बन सकता है  मीडिया तेंदुलकर को भगबान कहता है और खुद ही उसका भर पुवर प्रचार भी करता है परन्तु अम्बेडकर और मोदी को देवता तुल्य कहने पर इसे खेद है एह दोहरा माप दंड मीडिया कब तक अपनायेगा

आपने हर हर मोदी का विरोध किया हमे कोई ऐतराज नही है पर आपसे इतना सबाल है की ब्राहम्ण देवता बाकय के खिलाफ कब ट्रेल चलायेगा , कब इस बाकय के खिलाफ बैठकें लगा कर चर्चा करोगे और मीडिया ऐसा नही करता है तो मीडिया को ब्राहम्ण वादी या मनुवादी किओन ना कहा जाये , क्या ऐसे आयेगी पारदर्शिता , मीडिया को शर्म आणि चाहिए




किसी के बारे मे कोई भी आप शव्द और गाली देना कोई भी राज नीति नही कहती है परंतु आज कुछ लोग हैं जो मोदी और माया को लेकर गाली गलौंच का प्रयोग करते रहते है
 आज . लोगों की हिम्मत सिर्फ ढोंगी सेक़ुलर  के पकक्षपात और सरकार के मुस्लिम तुस्टीकरण के करण होता है जो अपनी मर्यादा भूल जाते हैं  और सरकार से भी बड़ा दोष तो हम हिन्दुओं का है जो दलित और स्वर्णो मे इस कदर टूटे पड़े हैं की लोग बड़ी आसानी से हमारे सामने हाआरए ही भाईओं को गाली देते रहते हैं मारेटे रहते है और हम देखते रहते है हम सोचते हैं की हमे क्या , हम तो सुरकक्षित हैं पिट तो दूसरा रहा है जिससे हमारा कोई वास्ता नही है जिस दिन हम हिन्दू ( हिन्दू ,सिख ,जैन , बुध , फ़ारसी ,आर्य समाजी, स्वर्ण ,दलित ) सब एक हो जायेंगे उस दिन कोई इंसान हमारे महापुर्षों को गाली देने से पहले 1000 बार सोचेगा और तब मूह खोलेगा

परंतु अफसोश तो इतना है की हम सब कभी एक हो ही नही सकते है हम सब जातिवाद के कारण ऐसे वाटे हुए हैं जैसे  एक सुन्दर काँच टूट कर अनगिनत टुकड़ों में बॅट जाता है हम लोगों को एक होना ही होगा अपने लिए ना सही अपने महा पुर्षों के सम्मान और देश की रक्छा के लिए

" जब तक जातिवाद रहेगा हिन्दुस्ता वरबाद रहेगा"
"जातिवाद मिटाओ सम्मान बचाओ"
"जातिवाद मिटाओ मानवता बचाओ"
"जातिवाद मिटाओ देश बचाओ"


माया और मोदी के अपमान का कारण दलित-स्वर्णो की आपसी फूट |

माया मोदी का अपमान नही सहेगा हिन्दुस्तान 

किसी के बारे मे कोई भी आप शव्द और गाली देना कोई भी राज नीति नही कहती है परंतु आज कुछ लोग हैं जो मोदी और माया को लेकर गाली गलौंच का प्रयोग करते रहते है
आज . लोगों की हिम्मत सिर्फ ढोंगी सेक़ुलर के पकक्षपात और सरकार के मुस्लिम तुस्टीकरण के करण होता है जो अपनी मर्यादा भूल जाते हैं और सरकार से भी बड़ा दोष तो हम हिन्दुओं का है जो दलित और स्वर्णो मे इस कदर टूटे पड़े हैं की लोग बड़ी आसानी से हमारे सामने हमारे    ही भाईओं को गाली देते रहते हैं मारते रहते है और हम देखते रहते है हम सोचते हैं की हमे क्या , हम तो सुरकक्षित हैं पिट तो दूसरा रहा है जिससे हमारा कोई वास्ता नही है जिस दिन हम हिन्दू ( हिन्दू ,सिख ,जैन , बुध , फ़ारसी ,आर्य समाजी, स्वर्ण ,दलित ) सब एक हो जायेंगे उस दिन कोई इंसान हमारे महापुर्षों को गाली देने से पहले 1000 बार सोचेगा और तब मूह खोलेगा
परंतु अफसोश तो इतना है की हम सब कभी एक हो ही नही सकते है हम सब जातिवाद के कारण ऐसे वाटे हुए हैं जैसे एक सुन्दर काँच टूट कर अनगिनत टुकड़ों में बॅट जाता है हम लोगों को एक होना ही होगा अपने लिए ना सही अपने महा पुर्षों के सम्मान और देश की रक्छा के लिए
" जब तक जातिवाद रहेगा हिन्दुस्ता वरबाद रहेगा"
"जातिवाद मिटाओ सम्मान बचाओ"
"जातिवाद मिटाओ मानवता बचाओ"
"जातिवाद मिटाओ देश बचाओ"

गुजरात दंगा नरसंघार बाकी सब दंगे भारत मिलाप: सेक़ुलर सोच

आज ही नहीं जब से हमने होश सम्भाला है   एक ही  दंगे कि चर्चा सुनी है गुजरात दंगा और चर्चा करने बाले  लोग तीन   बटे है  कांग्रेसी , ढोंगी सेकुलर जमात , और मीडिया  ऐसा लगता था कि हमारा   देश बहुत ही सेकुलर है कोई दंगा होता ही नहीं है सिर्फ एक दंगा हुआ है वो शायद करबाया गया था जिसकी घोर निंदा हर रोज़  तीनो तरह के लोग करते रहते हैं परन्तु जैसे २ हम समझदार हुए तो पता चला कि देश में गुजरात दंगों से भी भयंकर दंगे लगातार होते रहे है परन्तु चर्चा नहीं   होती है फिर  हमे लगा की इन तीनो प्रकार के लोगों को बाकी के दंगे  दंगे लगते ही नही है उनकी नज़र मे वो सब दंगे भरत मिलाप थे नरसंघार तो सिर्फ गुजरात मे हुआ इन लोगों की नज़रों मे गुजरात के बाहर मारे गये लोग इंसान की श्रेणी मे नही आते है हाल ही मे हुए सपा के राज मे मुज़फ्फर नगर दंगे भी लोगों को याद नही है परंतु गुजरात दंगे की जानकारी यह कांग्रेषी पैदा होने बाले बच्चो तक को दे चुके है अब भाई इनके दुआरा हुए भरत मिलाप की जानकारी तो बड़ी मुस्किल से हो पति है 

इन लोगों ने कितने भरत मिलाप करबाए हैं इतना तो हमे भी पता नही है चार पांच भरत मिलाप हमे भी पता है 

1-देश के बटवारे के समय पहला भरत मिलाप नेहरू और गाँधी की बजह से हुआ था 
2-इस देश के हर राज्य के अनगिनत कोनो मे अनगिनत भरत मिलाप कांग्रेस करवा चुकी है 
3-काश्मीर भरत मिलाप 
4-बांग्लादेश वन्ते समय का  भरत मिलाप 
5- असम के  भरत मिलाप 
6-1984 के सिख भरत मिलाप 
7-1 साल मे सपा ने 150 से जादा भरत मिलाप . है सेक़ुलरों का समर्थन और भी भरत मिलाप करवाने को जारी है  
इसके अलावा हमे ग्यात नही हैं पाठक लोग हमारा मार्ग दर्शन कर सकते है 

अब इन तीनो प्रकार के लोगो से सिर्फ एक सबाल इस देश मे मुस्लिम तुस्टीकरण के नाम पर और कितने भरत मिलाप कर्बाओयगे ? अगर आपका पेट भर गया हो तो बंद भी कर दो ऐसे भरत मिलाप .

मीडिया को एक सीख देना चाहता हूँ जब किसी दलित पर अत्याचार होता है तब आप . रहते हो अगर कोई मुद्दा उठाये तो कहते हो गड़े मुर्दे ना उखेड़ेन पर गुजरात दंगों पर बार बात करके आप गड़े मुर्दे नही उखेद रहे हो 

आज मीडिया की सोच मे कुछ निस्पाक्स और सकारात्मक परिवर्तन आया है वो भी  सोसल मीडिया के दवाव मे आगार आज भी नही सुधरे तो वो दिन दूर नही की लोग मीडिया पर भरोषा करना ही छोड़ दें जैसे सरकार से छोड़ दिया है 
अब तो हमें शर्म आनी चाहिए अब तो   एक ही आदमी का  पीछा  करना छोड़ दें   और भी कुछ है पीछा करने  को 


“सेक़ुलरता & मुस्लिम तुस्टीकरण” से “दलित-विकास का अंत”

आज इस देश मे मीडिया मुस्लिम कांग्रेश और ढोंगी सेक़ुलर ज़मात एक साथ एक स्वर मे  दो टीन शब्दों पर बहुत चर्चा करते हैं
1- सेक़ुलरता को साम्प्रदायिकता से खतरा है उनका मतलव है मुस्लिम को खतरा है
2-सच्चर कमेटी कहती है की मुस्लिमों की हालत दलितों से भी बदतर है इसके लिए साम्प्रदायिकता और भ्रस्ताचार जिम्मेदार है
3-मुस्लिमों को अरकछन मिलना चाहिए उनका मतलव सॉफ है की मुस्लिम तुस्टीकरण होना चाहिए

हम किसी पर कोई आरोप नही लगा रहे हैं जो सच है उसे कहने मे कोई परहेज़ नही करते हैं

1-ढोंगी सेक़ुलरों के लिए सेक़ुलरता का मतलव है पूर्ण रूप से मुस्लिम तुस्टीकरण पिछले 60 सालों से कांग्रेश और उसके सहयोगी दल सिर्फ और सिर्फ एही काम कर रहे हैं मुस्लिम तूस्टी कर्ण करके मुसलमानो को एक वोट बैंक बनाया गया है और विकास को पीछे रखा गया है . साम्प्रदायिकता की बात करते हो सबसे ज़ादा दंगे तो आपके राज मे ही हुए है
2- सच्चर कमेटी का मतलव ही एह  की मुस्लिम तुस्टीकरण के लिए कोई नकली और ठोस आधार बनाया जाये हम सच्चर कमेटी को फर्ज़ी मानते है अगर उसमे कोई ज़रा सी भी सच्चाई है तो उसके लिए मुस्लिम और सरकार खुद ज़िम्मेदार है इसके लिए दलितों का हक चीन कर मुस्लिमों को देना सारा सर अन्याय है हम इसकी निन्दा करते हैं इसके कुछ करण हम नीचे प्रिंट कर रहे हैं
3- मुस्लिमों को अरकछन सरसर गलत और अनन्याय पूर्ण है सिर्फ और सिर्फ मुल्ला पूजन है वोट बैंक की राजनीति है
कारण
1- हर दिन सेक़ुलरता पर बात करके और मुस्लिमों की दयनीय अवस्था को दिखाना उआर दलितों को नज़र अंदाज़ करना सेक़ुलरता की आद मे अम्बेडकरवाद को खतम करने की साज़िस है जिसे कभी कामयाव नही होने दिया जायेगा अम्बेडकर साहव ने कभी एह नही कहा था की तुम मुस्लिमो के लिए दलितों को नज़र अंदाज़ करना  कांग्रेश और छदम सेक़ुलरों ने हमेसा से एही किया है
2-दलित हज़ारो वर्षों से पीड़ित और शोसित है मुस्लिम नही
3- दलितों ने देश पर कभी राज नही किया था मुसलमानो ने कई सौ वर्षों राज किया है 4-दलितों ने इस देश की संस्क्रति वृीसता को कोई नुकसान नही किया है परंतु मुस्लिम शासकों ने किया है
5- दलितों ने कभी दंगे नही किए है परंतु अलगाव वादी मुस्लिम ऐसा करने मे सबसे आगे  हैं
6-दलितों ने कभी अलग देश नही मांगा है परंतु मुस्लिम हमेशा ऐसे काम करते रहे हैं
7-दलितों ने देश की टुकड़े नहीकर बाये
8- दलित कभी पाकिस्तानी झंडे नही फहराता है
9-दलित वन्देमातरम कहने से परहेज़ नही करता है
10-दलित खेलों मे पाकिस्तान जिंदाबाद और हिन्दुस्तान मुर्दा बाद के नारे नही लगाता है
11-दलित कभी अपने मंदिरों मे हतयार नही रखता है
12-दलित मे अगर किसी के बच्चों की सांख्या ज़ादा है तो वो अग्यान्ता से हो सकती है किसी मझवी गुरु के कहने से योजना बढ तरीके से नही बड़ातः है देश पर कवज़ा करने को 13-दलित आतंकवादी नही वनता है परंतु ...................................
14-दलित पोलीयो के ड्रॉप को अपने बच्चों को पिलाने से परहेज़ नही करता है
15-दलित किसी भाषा का अपमान नही करता है
16- अगर कोई दलित के महा पुरुष का अपमान पस्चिम मे होता है तो भारत की सम्पतिई में आग नही लागात है
परंतु मुस्लिमों की इस्थिति इसके उलट ही होती है

आज भी दलित ही सबसे जाड़ा पीड़ित और भेदभाव का सिकार है परन्तु वो हर चोट मोती बात पर उपद्रव नही काटता है

कांग्रेश ने सिर्फ और सिर्फ दलितों के साथ अनन्य्या ही किया है मुस्लिम तुस्टीकरण करके दलितों को अविकास की खाई मे फैंक दिया है

1-आज ऐक्टर मुस्लिम हैं पर कोई दलित नही है
2-मीडिया चैनल मुस्लिमों के हैं परंतु दलितों के नही है
3- सिंगार , संगीतकार , हर छेत्र मे मुस्लिम आगे  हैं  परंतु दलितों का कोई नाम नही आता है ऐसा सिर्फ इसलिए है कांग्रेश ने सिर्फ मुस्लिम तुस्टीकरण करके मुस्लिमों को आयेज बड़ाया है दलितों को आगे बडाना तो दूर की बात उनेह पास बिताना भी पाप समझते है एक छेत्र है जिसमे अरकछन के करण मजबूरी मे दलितों को रखना पड़ता है वो है राजनीति पर उसमे भी उन्ही को आयेज बड़ाया है जी ग़ुलाम टयप और कठपुतली की . के होते है आगरा अरकछन नही होता तो राजनीति मे भी दलित कंही नही दिखते सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम ही दिखते और आज़ वो करने भी लगे है आज दलितों को सिर्फ आरकसित सीटों से लडवाया जाता है अन्य से नही परंतु मुस्लिमों को लड़बाया जाता है
कॅब तक हम दलितों से भेद भाव करोगे उर कब तक हम चुप बैठे रहेंगे अब तो हद कर दी है सच्चर कमेटी बना कर दलितों का अरकछन भी छीनने का प्लान इन सेक़ुलरों ने कर लिया है आज भी अगर दलित इन सबका प्लान नही समझे तो एह लोग तुस्टीकरण और सेक़ुलरता की आध मे दलितों को अविकास की गर्त मे डाल देंगे और दलितों पर पहले की तरह ही अत्याचार होने लगेंगे