बुधवार, 2 अप्रैल 2014

गुजरात दंगा नरसंघार बाकी सब दंगे भारत मिलाप: सेक़ुलर सोच

आज ही नहीं जब से हमने होश सम्भाला है   एक ही  दंगे कि चर्चा सुनी है गुजरात दंगा और चर्चा करने बाले  लोग तीन   बटे है  कांग्रेसी , ढोंगी सेकुलर जमात , और मीडिया  ऐसा लगता था कि हमारा   देश बहुत ही सेकुलर है कोई दंगा होता ही नहीं है सिर्फ एक दंगा हुआ है वो शायद करबाया गया था जिसकी घोर निंदा हर रोज़  तीनो तरह के लोग करते रहते हैं परन्तु जैसे २ हम समझदार हुए तो पता चला कि देश में गुजरात दंगों से भी भयंकर दंगे लगातार होते रहे है परन्तु चर्चा नहीं   होती है फिर  हमे लगा की इन तीनो प्रकार के लोगों को बाकी के दंगे  दंगे लगते ही नही है उनकी नज़र मे वो सब दंगे भरत मिलाप थे नरसंघार तो सिर्फ गुजरात मे हुआ इन लोगों की नज़रों मे गुजरात के बाहर मारे गये लोग इंसान की श्रेणी मे नही आते है हाल ही मे हुए सपा के राज मे मुज़फ्फर नगर दंगे भी लोगों को याद नही है परंतु गुजरात दंगे की जानकारी यह कांग्रेषी पैदा होने बाले बच्चो तक को दे चुके है अब भाई इनके दुआरा हुए भरत मिलाप की जानकारी तो बड़ी मुस्किल से हो पति है 

इन लोगों ने कितने भरत मिलाप करबाए हैं इतना तो हमे भी पता नही है चार पांच भरत मिलाप हमे भी पता है 

1-देश के बटवारे के समय पहला भरत मिलाप नेहरू और गाँधी की बजह से हुआ था 
2-इस देश के हर राज्य के अनगिनत कोनो मे अनगिनत भरत मिलाप कांग्रेस करवा चुकी है 
3-काश्मीर भरत मिलाप 
4-बांग्लादेश वन्ते समय का  भरत मिलाप 
5- असम के  भरत मिलाप 
6-1984 के सिख भरत मिलाप 
7-1 साल मे सपा ने 150 से जादा भरत मिलाप . है सेक़ुलरों का समर्थन और भी भरत मिलाप करवाने को जारी है  
इसके अलावा हमे ग्यात नही हैं पाठक लोग हमारा मार्ग दर्शन कर सकते है 

अब इन तीनो प्रकार के लोगो से सिर्फ एक सबाल इस देश मे मुस्लिम तुस्टीकरण के नाम पर और कितने भरत मिलाप कर्बाओयगे ? अगर आपका पेट भर गया हो तो बंद भी कर दो ऐसे भरत मिलाप .

मीडिया को एक सीख देना चाहता हूँ जब किसी दलित पर अत्याचार होता है तब आप . रहते हो अगर कोई मुद्दा उठाये तो कहते हो गड़े मुर्दे ना उखेड़ेन पर गुजरात दंगों पर बार बात करके आप गड़े मुर्दे नही उखेद रहे हो 

आज मीडिया की सोच मे कुछ निस्पाक्स और सकारात्मक परिवर्तन आया है वो भी  सोसल मीडिया के दवाव मे आगार आज भी नही सुधरे तो वो दिन दूर नही की लोग मीडिया पर भरोषा करना ही छोड़ दें जैसे सरकार से छोड़ दिया है 
अब तो हमें शर्म आनी चाहिए अब तो   एक ही आदमी का  पीछा  करना छोड़ दें   और भी कुछ है पीछा करने  को 


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