बुधवार, 2 अप्रैल 2014

दलित समाज का किसी एक पार्टी का स्थाई वोट बनना घातक होगा|

आज समय वो नही की कोई भी जाती के लोग या समाज के लोग किसी एक पार्टी के स्थाई वोट बैंक बने इसके बहुत घातक परिणाम हो सकते है |

1-            जब आपकी पार्टी शासन मे होगी तब उस पर किसी एक जाती के लोगों का तुस्टीकरण का आरोप लगेगा जो की पार्टी के भविष्य के लिए घातक होगा
2-            अन्य जाती के लोग आपकी जाती से प्रेम की जगह अंदरूनी नफरत करने लगेंगे.
3-            समाज मे जातिगत विदेश बड़ेगा
4-            जातियों मे टकराब की स्थिति पैदा होगी
5-            कुछ समय तो कोई पार्टी आपका विकास करेगी परंतु जब उसे विस्वास हो जायेगा की एह सिर्फ मेरा वोट बैंक है और मुझसे बाहर नही जाने बाला है वो पार्टी आपकी तरफ ध्यान करना बंद कर देगी , अब वो आपका नुकसान करने से भी परहेज नही करेगी
6-            एक ही पार्टी के लोग निरन्कुश और तानसाह जैसे हो जायेंगे
7-            जब आप की पार्टी सरकार मे नही होगी तब दूसरी  सरकार आपके साथ भेदभाव करेगी
8-            एह भी हो सकता है आपसे जातिगत भेदभाव मानते हुए आपका नुकसान जान बूझ कर किया जाये
9-            आपके नेता सरकार मे ना होने की बजह से आपकी मदत करने मे असमर्थ होंगे
10-          कोई भी अन्य दल का नेता आपके संकट के समय मे आपका साथ नही देता है जो की बहुत दुखद होता है
11-          दलितों पर अत्याचार की घटनायें बड जाती हैं
हमारा मानना है की दलितों को वोट बैंक तो बनना चाहिए परन्तु किसी एक पार्टी का स्थाई वोट बैंक नही बनना चाहिए वोट बैंक हो पर वो परिवर्तनीय हो और परिवर्तन का आधार सामाजिक एकता और सुविकास हो , और जो भी पार्टी या उम्मेदवार ऐसा करने मे सशक्त हो उसी को वोट करना चाहिए अगर वो नेक्स्ट समय मे आपकी शर्तों पर खरा ना उतरे तो उसे एक भी वोट नही पड़ना चाहिए , जब तक दलित भाई ऐसा नही करेंगे तब तक दलितों का सोशॅड जारी रहेगा और याद रखने की बात एह है जो आपका हिमायती वनता है वो भी अप्रतक्ष रूप से आपका शोसन करेगा

हम समझते है की  हमारे दलित भाई जागरूक हैं और  वो कोई गलती नही करेंगे और नही किसी पार्टी के स्थाई वोट बैंक वनेगे .



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