आज दिनांक 3.4.14 को एक न्यूज़ चैनल ने मोदी के गुलावी क्रांति के विरोध मे दिए गय भासन पर एक प्रोग्राम चल्लाया था जिसका नाम रखा था गुलावी क्रांति के बहाने हिन्दुत्व , और सेक़ुलरों का सीधा सा आरोप था की इसके बहाने मोदी साम्प्रदायिकता फैला रहे है , उनका काम तो आरोप लगाना है परंतु अफसोश सिर्फ इतना था की वँहा पर बैठा कोई भी भाजपा नेता इसका खण्डन ठीक से नही कर पाया था जो लोग भी जबाब दे रहे थे वो सब गोल मोल जबाब थे हो सकता है भाजपा अपने कुछ राजनीतिक फायदे के लिए खुल कर ना बोल पाती हो परंतु जो सेक़ुलर है वो इस कदर मुल्ला पूजन मे गिर जांएगे कभी सोचा भी नही था , अब तो एही कहा जा सकता है की ढोंगी सेक़ुलरों के लिए मुल्ला पूजन मे बस एक ही कमी रह गई ( गाय का ......... ) जिससे में कह नही सकता . अरे सेक़ुलरों शर्म करो मुल्लपूजन के लिए अपने महा पुर्षों के विचारों तक की बलि देने से नही चूक रहे हो अब तो गिरने की हद हो गई है ,इसी करण से लोग और पड़े लिखे यूबा सेक़ुलरता से नफरत करने लगे हैं , सेक़ुलरता का मतलव समानता ,एकता और रास्तरभक्ति होता है मुल्लपूजन से अपने तो सेक़ुलरता का पूरा अर्थ ही बदल दिया हा है , “अपने पशओं का मांस बेंचकर अमीर बनने से भला है गरीव रहना”
गुलावी क्रांति के खिलाफ बोलने पर आप मोदी को साम्प्रदायिक कहते हो मत भूलो की इस देश के हर बड़े महापुरुष ने पशु धन को बचाने की और जीव हत्या ना करने की बात कही है आपने सिर्फ मोदी साम्प्रदायिक नही कहा हमारे महा पुरुष का अपमान किया है इसके लिए आज की जनता आप को माफ नही करेगी
1-सबसे पहले भगबान श्री क्रशन पशु पूजक थे भकछक नही .
2- भगबान श्री महावीर जी क्या वो जीव हत्या के विरोधी नही थे ?
3-भगबान गौतम बुद्ध जी क्या वो जीव हत्या के विरोधी नही थे ?
4-बाबा सहव अम्बेडकर जी क्या वो जीव हत्या के विरोधी नही थे ?
5-गुरु नानक देव जी क्या वो जीव हत्या के विरोधी नही थे ?
6-संत श्री कवीर दास जी क्या वो जीव हत्या के विरोधी नही थे ?
7-संत श्री रविदास जी क्या वो जीव हत्या के विरोधी नही थे ?
8-गाँधी जी क्या वो जीव हत्या के विरोधी नही थे ?
9-स्वामी दायनाद, विवेकानाद आदि
10-इस देश के सम्भिधान मे सॉफ 2 लिखा है की पशु धन की रक्षा होनी चाहिए .
इन तथा कथित मुलापूजकों के लिए उपरोक्त सभी साम्प्रदायिक हुए किओंकी सभी पशु हत्या के विरोधी थे सेक़ुलर तो सिर्फ मुल्ला पूजक ही है .
आज दूध उत्पादन मे जिस तरह से कमी आ रही है उसका कोई पैमाना नही है एक कांग्रेषी कह रा था की डेयरी की रिपोर्ट के हिसाब से दूध का उत्पादन बड़ा है
पर किस अनुपात मे आज जिस अनुपात मे जनसंख्या है और जिस तरह की आबस्यकता के अनुसार ना के बराबर है लोग दूध पीने की दूर की बात है चाय के लिए भी मुस्किल से जुटा पाते है
हमारे बचपन मे जो भैंसा खेती कार्य हेतु 5000 रूपय मे मिलता था आज वो 70000—80000 के वीच मिलता है एह सब मांस उत्पादन के करण है
मुझे एक बात समजह नही आती की इन ढोंगी सेक़ुलर कुत्तों को जबाब सिर्फ एक मोदी ही देगा बाकी के सब लोगों ने चूडियाँ पहन रखी है , बाकी सब लोगों के मूह क्या सिल गये है , साँप सूंघ गया है क्या एह देश अकेले सिर्फ मोदी का ही है हम लोगो का कोई फ़र्ज़ नही वनता है . में अपने पाठकों से अति कड़े शब्दो के लिए माफी चाहता हून पर जिस तरह बेज़ुबां जानवरों को काटने के लिए एह सेक़ुलर उत्साहित होकर बोलते हैं उसे आत्मा घायल हो जाती है , क्या बिगाड़ा है इन बेज़ुबां जान बारों ने जो उनको खतम करबाने पर तुले हुए हैं एह सेक़ुलर
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें